PM Vishwakarma Yojana 2025 – लाखों लोगों को बड़ा फायदा मिलेगा!

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना (PM Vishwakarma Yojana 2025) हैं इस मोदी सरकार ने इस योजना को 2023 से लागू किया, जिसके तहत देश के जरूरत मंद लोगों को आर्थिक मदद के साथ साथ काम करने की कला और प्रशिक्षण प्रदान किया जाता हैं पीएम विश्वकर्मा योजना आज पूरे देश में शुरू हो गई हैं जिसके चलते हर कोई इस योजना में अप्लाई कर सकता हैं और लाभ ले सकता हैं

योजना का उद्देश्य:

भारत के पारंपरिक और घरेलू कारीगरों व शिल्पकारों को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी आजीविका को बेहतर बनाना और उन्हें डिजिटल, फाइनेंशियल और टेक्निकल रूप से सशक्त करना।

PM Vishwakarma Yojana योजना के प्रमुख लाभ

• लोन सुविधा ₹3 लाख तक (दो चरणों में)
• ब्याज दर सिर्फ 5% (सरकारी सब्सिडी के बाद)
• टूलकिट वाउचर ₹15,000 तक आधुनिक औजारों के लिए
• फ्री स्किल ट्रेनिंग 5 से 15 दिन की तकनीकी ट्रेनिंग
• स्टाइपेंड ट्रेनिंग के दौरान ₹500/दिन
• डिजिटल लेन-देन का प्रोत्साहन UPI जैसी सुविधा की ट्रेनिंग
• ब्रांडिंग और मार्केटिंग उत्पादों को ऑनलाइन/बाजार में बेचने का सहयोग
• लोन पर कोई गारंटी नहीं गारंटी-फ्री लोन
• प्रमाणपत्र विश्वकर्मा प्रमाण-पत्र और ID

लोन की राशि और फेज (EMI व ब्याज सहित)
टेबल
चरण राशि ब्याज EMI अवधि
पहला चरण ₹1,00,000 5% ₹2,000–₹2,200 प्रति माह 18 महीने
दूसरा चरण ₹2,00,000 5% ₹3,800–₹4,200 प्रति माह 30 महीने
> नोट: दूसरा लोन तभी मिलेगा जब पहला लोन सफलतापूर्वक चुका दिया गया हो।

कौन-कौन आवेदन कर सकता है? (Eligibility)

• आवेदक की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए
• पारंपरिक कारीगर या शिल्पकार होना चाहिए (18 मान्यता प्राप्त पेशों में से एक)
• किसी अन्य सरकारी स्वरोजगार योजना (जैसे मुद्रा) से लाभ नहीं लिया होना चाहिए
• ग्रामीण/शहरी क्षेत्र – दोनों के लिए लागू
• एक परिवार से एक ही व्यक्ति को पात्रता मिलेगी
PM Vishwakarma Yojana 2025 योजना में आवेदन करने से पहले निम्न शर्तें के बारे मैं जरूर जाने उसके बाद ही अप्लाई का विचार करें

शामिल 18 पारंपरिक पेशे (Recognized Trades)

क्रम पेशा (Trade) निम्न प्रकार के वर्गों का विवरण यहां प्रदान किया गया है जो इस योजना के असली हकदार हैं
1 बढ़ई (Carpenter)
2 लोहार (Blacksmith)
3 कुम्हार (Potter)
4 दर्जी (Tailor)
5 मोची/चर्मकार (Cobbler)
6 सुनार (Goldsmith)
7 राजमिस्त्री (Mason)
8 नाई (Barber)
9 धोबी (Washerman)
10 हथकरघा बुनकर
11 खिलौना निर्माता
12 पत्थर तराशक
13 माली
14 मूर्तिकार
15 नाव निर्माता
16 साइकिल मरम्मतकर्ता
17 फिशिंग नेट मेकर
18 लोहे/तांबे/पीतल कारीगर
ऊपर दिए गए सभी पेशे PM Vishwakarma Yojana में शामिल किए गए हैं इसके तहत हर कोई आसानी से योजना का लाभ उठा सकता हैं

जरूरी दस्तावेज

आधार कार्ड पहचान प्रमाण
मोबाइल नंबर OTP वेरिफिकेशन
बैंक पासबुक/IFSC DBT के लिए
पासपोर्ट साइज फोटो आवेदन फॉर्म में
जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू) आरक्षण लाभ हेतु
पेशे से संबंधित प्रमाण कार्य के फोटो या अन्य
इस योजना में ऑनलाइन आवेदन या ऑफलाइन आवेदन करने से पहले मांगे गए सभी डॉक्यूमेंट तैयार जरूर कर ले ताकि बाद में कोई भी दिक्कत ना आकर सीधे ही अप्लाई अप्रूवल हो जाएं

आवेदन प्रक्रिया

PM Vishwakarma Yojana 2025 में ऑनलाइन आवेदन कैसे करना हैं इसकी पूरी जानकारी आपको यहां प्रदान की गई हैं जो आप स्टेप बाय स्टेप देख सकते हैं और अप्लाई कर सकते हैं सबसे पहले योजना की शर्तें और नियम जरूर देखें उसके बाद ही अप्लाई का विचार करें। वेबसाइट खोलें:
• “Apply Now” बटन पर क्लिक करें, मोबाइल नंबर और OTP से रजिस्टर करें
• आधार से ई-केवाईसी करें, कार्य का चयन करें (जैसे दर्जी, लोहार आदि)
• दस्तावेज अपलोड करें, सबमिट करें और आवेदन नंबर सुरक्षित रखें
• लोकल CSC से मदद भी ली जा सकती है आवेदन में कोई दिक्कत आती हैं तो नजदीकी किसी CSC सेंटर से सोल्व करा सकते हैं

ट्रेनिंग की पूरी जानकारी

PM Vishwakarma Yojana 2025 में नजदीकी ITI या ट्रेनिंग सेंटर, स्टाइपेंड ₹500 प्रति दिन
सिखाई जाने वाली बातें आधुनिक औजारों का उपयोग, UPI, डिजिटल भुगतान, ग्राहक सेवा
15 दिन की ट्रेनिंग होगी जिसमें रोजाना 500 रुपए मिलेंगे
टेक्स से संबंधित जानकारी (Tax Benefits/Implications)
यह एक गवर्नमेंट सब्सिडाइज्ड स्कीम है, इसलिए:
लोन पर मिलने वाली सब्सिडी कर योग्य नहीं है
लोन की EMI का भुगतान व्यक्तिगत व्यवसाय खर्च में शामिल किया जा सकता है

यदि लाभार्थी GST के अंतर्गत आता है, तो औजारों की खरीद पर GST इनपुट क्रेडिट मिल सकता हैप् रशिक्षण या टूल किट पर अलग से कोई टैक्स नहीं लगेगा (सरकार द्वारा वहन किया गया है)योजना की खास बातें (Key Highlights)

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना में प्रशिक्षण कैसे होता है? पूरी जानकारी

भारत की पारंपरिक कारीगरी और शिल्प संस्कृति हजारों वर्षों पुरानी है। विश्वकर्मा समुदाय के लोग जैसे लोहार, बढ़ई, सुनार, राजमिस्त्री, दर्जी, कुम्हार, नाई, माली आदि, सदियों से समाज की आधारशिला को मजबूत करते आए हैं। लेकिन आधुनिक युग की भागदौड़ और तकनीकी प्रगति के बीच ये पारंपरिक व्यवसाय धीरे-धीरे पिछड़ते जा रहे थे। इन्हें न तो आधुनिक संसाधन उपलब्ध हो पा रहे थे, न ही नई तकनीक की जानकारी। इसी समस्या को दूर करने के लिए भारत सरकार ने 17 सितंबर 2023 को “प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना” की शुरुआत की, जिसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है – व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण (Skill Training)। इस प्रशिक्षण का मकसद न केवल इन कारीगरों को उनके काम में तकनीकी दक्षता दिलाना है, बल्कि उन्हें बाजार की मांग के अनुसार आत्मनिर्भर बनाना भी है।

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत दिया जाने वाला प्रशिक्षण एक औपचारिक और चरणबद्ध प्रक्रिया के तहत संचालित होता है। सबसे पहले, किसी भी इच्छुक कारीगर को योजना की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन करना होता है। यह आवेदन पूरा करने के लिए आधार कार्ड, बैंक खाता, कार्य प्रमाण, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो आदि दस्तावेजों की आवश्यकता होती है। आवेदन करने के बाद सरकार स्थानीय निकायों जैसे ग्राम पंचायत, नगर पालिका या नगरीय निकायों से आवेदक के पेशे की पुष्टि करवाती है ताकि केवल वास्तविक और सक्रिय कारीगर ही इस योजना का लाभ प्राप्त कर सकें। यह एक आवश्यक कदम है जिससे योजना का लाभ उन लोगों को ही मिले जो वास्तव में पारंपरिक कारीगरी में लगे हुए हैं।

एक बार आवेदन स्वीकृत हो जाने पर संबंधित विभाग द्वारा कारीगर को पास के प्रशिक्षण केंद्र पर प्रशिक्षण के लिए आमंत्रित किया जाता है। ये प्रशिक्षण केंद्र देशभर में फैले हुए हैं और सरकार ने इसके लिए इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (ITI), प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के मान्यता प्राप्त केंद्रों, और अन्य निजी प्रशिक्षण प्रदाताओं को अधिकृत किया है। ट्रेनिंग दो भागों में बंटी होती है – बेसिक ट्रेनिंग और एडवांस ट्रेनिंग। बेसिक ट्रेनिंग आम तौर पर 5 से 7 दिन की होती है जिसमें पारंपरिक औजारों के सुरक्षित और कुशल उपयोग, कार्य की गुणवत्ता, ग्राहक से व्यवहार और सुरक्षा नियमों के बारे में बताया जाता है। वहीं एडवांस ट्रेनिंग लगभग 15 से 30 दिनों की होती है जिसमें कारीगरों को आधुनिक उपकरणों की जानकारी, डिजिटलीकरण, ब्रांडिंग, ऑनलाइन मार्केटिंग, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ने की विधि और बिजनेस स्किल्स सिखाई जाती है।

इस प्रशिक्षण के दौरान हर कारीगर को सरकार की ओर से प्रति दिन ₹500 तक का स्टाइपेंड भी दिया जाता है। मतलब अगर कोई कारीगर बेसिक और एडवांस दोनों प्रशिक्षण लेता है, तो उसे ₹15,000 तक की सहायता सीधी बैंक खाते में मिल सकती है। इसके अलावा, हर प्रशिक्षणार्थी को ₹15,000 मूल्य तक का टूलकिट वाउचर भी मुफ्त दिया जाता है, जिससे वह अपने व्यवसाय के लिए जरूरी औजार खरीद सके। यह कदम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पारंपरिक कारीगरों को अक्सर औजार खरीदने के लिए आर्थिक संकट का सामना करना पड़ता है।

ट्रेनिंग खत्म होने के बाद सरकार द्वारा एक टेस्ट या असेसमेंट लिया जाता है, जिसमें कारीगरों की दक्षता का मूल्यांकन किया जाता है। सफल होने पर उन्हें एक राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है, जो आगे चलकर लोन लेने, मार्केट में ब्रांड वैल्यू बढ़ाने और सरकारी योजनाओं में आवेदन के लिए उपयोगी होता है। प्रमाण पत्र मिलने के बाद सरकार उन्हें ₹1 लाख तक का बिना गारंटी लोन भी मुहैया कराती है, जिसकी ब्याज दर सामान्य से बहुत कम होती है। योजना का उद्देश्य केवल उन्हें कुशल बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी मजबूत करना है, ताकि वे अपने हुनर को छोटे व्यवसाय में बदल सकें।

ट्रेनिंग विशेष

इस ट्रेनिंग की खास बात यह है कि यह केवल तकनीकी ज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कारीगर को एक आधुनिक उद्यमी (Entrepreneur) के रूप में ढालने की पूरी कोशिश करती है। प्रशिक्षण में उन्हें यह भी सिखाया जाता है कि वे अपने उत्पादों को कैसे पैकेज करें, ब्रांडिंग कैसे करें, सोशल मीडिया और वेबसाइटों के जरिए ग्राहकों तक कैसे पहुंचें, और सरकारी सहायता का कैसे लाभ लें। यह प्रशिक्षण उन्हें भविष्य के लिए तैयार करता है और पारंपरिक शिल्प को एक नया जीवन देता है।

अगर आप किसी भी पारंपरिक कौशल से जुड़े हैं, जैसे दर्जी, बढ़ई, सुनार, लोहार, राजमिस्त्री, नाई, माली या कुम्हार – तो यह योजना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। सरकार आपको मुफ्त में प्रशिक्षण, औजार, आर्थिक सहायता और पहचान देने के लिए तैयार बैठी है। आपको बस एक कदम बढ़ाकर आवेदन करना है और इस योजना का हिस्सा बनना है। सरकार के इस प्रयास से आने वाले वर्षों में न केवल कारीगरों की स्थिति सुधरेगी, बल्कि भारत की पारंपरिक शिल्प संस्कृति को भी वैश्विक मंच पर पहचान मिलेगी।

केंद्र सरकार द्वारा पूरी तरह से प्रायोजित
बजट 2024–25 में ₹13,000 करोड़ आवंटित
लाभार्थी का चयन जिला स्तर पर समिति द्वारा किया जाएगा
बैंक लोन आसानी से मंजूर होगा क्योंकि गारंटी सरकार देती है
राष्ट्रीय स्तर पर ट्रेनिंग पार्टनर नियुक्त

भविष्य की योजना (Expansion Plan)

सरकार इस स्कीम को e-commerce प्लेटफार्म जैसे GeM (Government eMarketplace), ONDC, Flipkart, Amazon आदि से जोड़कर शिल्पकारों को डिजिटल मार्केट में पहुंच दिलाने की योजना बना रही है।

अक्सर पूछे गए सवाल (FAQs)

Q1. क्या ये लोन सब्सिडी के तहत है?
हां, इस लोन पर ब्याज सब्सिडी केंद्र सरकार देती है।

Q2. क्या इसमें कोई गारंटी देना पड़ेगा?
नहीं, यह गारंटी-मुक्त लोन है।

Q3. क्या आवेदन के बाद रजिस्ट्रेशन नंबर मिलता है?
हां, ऑनलाइन आवेदन के बाद एक यूनिक एप्लीकेशन ID मिलती है।

Q4. क्या मुद्रा लोन ले चुके लोग इसमें आवेदन कर सकते हैं?
नहीं, जिन्होंने पहले से मुद्रा या इसी प्रकार की स्वरोजगार योजना ली है, वे पात्र नहीं हैं।

Q5. ट्रेनिंग अनिवार्य है?
हां, पहले लोन के बाद ट्रेनिंग लेना जरूरी है।

मेरा व्यक्तिगत विचार

प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना 2025 एक क्रांतिकारी पहल है जो उन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ रही है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज किया जाता है। इस योजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह सिर्फ लोन तक सीमित नहीं है — यह एक संपूर्ण हुनर विकास + वित्तीय सहयोग + डिजिटल सशक्तिकरण + मार्केट कनेक्टिविटी का पैकेज है।

अगर यह योजना ज़मीनी स्तर तक सही तरीके से लागू होती है तो यह भारत के छोटे कारीगरों को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।

सुझाव
> अगर आप एक पारंपरिक कारीगर हैं या किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो इस पेशे में है, तो उन्हें यह जानकारी जरूर दें और योजना में आवेदन करने के लिए प्रेरित करें।

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